ek aur janmdin

12 Sep

एक और जन्मदिन आया है,
एक और वर्ष बीत गया!

कितने सिकुड़ गए हैं अब बरस?
क्या है याद मुझे पिछले बरस से!

कुछ चेहरे जो झिड़क-तुनक कर चले गए,
कुछ आंसू जो टपक-टपक कर गिर गए,
कुछ साथी जो हाथ झटक कर चले गए,
कुछ पत्थर जो मुझपे सर पटक कर चले गए,

कुछ तमन्नाएं जो रहम-सहम के रह गयी,
कुछ कल्पनाएँ जो उमड़-घुमड़ के रह गयी,
कुछ बातें जो जो होठों पे थम के रह गयी,
कुछ यादें जो फ़ैल-सिमट कर बन गयीं;

क्या है याद मुझको पिछले बरस से?

ज़िन्दगी तुम्हारे बिना बस सालों का इक संग्रह है…

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